मोदी की कूटनीति के आगे बेअसर हुए ट्रंप के कड़े तेवर
ट्रंप को ‘मोदी टफ नेगोशिएटर’ कहने पर किया विवश
मोदी ने ट्रेड वॉर को संबंधों पर नहीं होने दिया हावी
विशेष टिप्पणी : कन्हैया कोष्टी
अहमदाबाद, 14 फरवरी : अमेरिका में राष्ट्रपति पद संभालते ही पूरी दुनिया पर ‘टैरिफ टेरर’ फैलाने वाले डोनल्ड ट्रंप के तेवर भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने उतने तीखे नहीं दिखे, जितने कि वे राष्ट्रपति बनते ही दिखा रहे थे।
ट्रंप ने अमेरिका में दोबारा सत्ता संभालते ही भारत सहित कई देशों पर टैरिफ के मुद्दे पर जमकर आक्रामक रवैया अपनाया। नरेन्द्र मोदी के अमेरिका दौर से पहले तक ट्रंप बार-बार भारत का भी नाम लेकर धौंस जमाते रहे कि भारत अमेरिकी सामान पर भारी टैरिफ वसूलता है। ऐसे में अब अमेरिका भी अपने यहाँ भारतीय सामान पर उतना ही टैरिफ वसूल करेगा, जितना भारत करता है।
आज जब ट्रंप की इस धौंस के कारण दुनियाभर में हड़कंप मचा हुआ है, तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अमेरिकी दौरे को लेकर भी यही संभावना जताई जा रही थी कि टैरिफ के मुद्दे पर मोदी की ट्रंप के साथ पुरानी सुपरहिट केमिस्ट्री का असर नहीं पड़ेगा, लेकिन शुक्रवार को वॉशिंगटन डीसी में ट्रंप के साथ मुलाकात के बाद मोदी ने सिर्फ एक लाइन में ट्रंप के टैरिफ टेरर का करारा जवाब दे दिया।
मोदी ने ट्रंप के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में जब यह कहा, “जिस प्रकार राष्ट्रपति ट्रंप अपने देश के हित को सर्वोपरि रखते हैं, उसी प्रकार मैं भी अपने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखता हूँ”; तो इसके साथ ही स्पष्ट हो गया कि टैरिफ के मुद्दे पर ट्रंप के तीखे तेवर मोदी की धमक के आगे बेअसर रहे हैं।
मोदी-ट्रंप के संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में दोनों नेताओं ने कई बातें कहीं, परंतु मोदी ने सर्वाधिक चर्चित टैरिफ के मुद्दे पर ट्रंप को अपनी ‘नेशन फर्स्ट’ नीति के जरिये जता दिया कि भारत भी अपने हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।
पूरी दुनिया की निगाह मोदी-ट्रंप की मुलाकात पर थी। विश्व के कई देश तो टैरिफ के मुद्दे पर भारत और अमेरिका के बीच विवाद पैदा होने की आशंका व्यक्त कर रहे थे, क्योंकि सभी जानते हैं कि मोदी भी ‘नेशन फर्स्ट’ के मामले में ट्रंप से पीछे नहीं हैं, लेकिन मोदी ने अपनी सफल कूटनीति के जरिये भारत-अमेरिका संबंधों पर ट्रेड वॉर को हावी नहीं होने दिया।
इतना ही नहीं; मोदी ने ट्रंप के साथ अपनी द्विपक्षीय बातचीत में ऐसी रणनीति अपनाई, जिससे ट्रंप ने यह भाँप लिया कि मोदी पर टैरिफ के मुद्दे पर हावी होना आसान नहीं है। यही कारण है कि ठीक पाँच साल बाद ट्रंप को इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिर एक बार दोहराना पड़ा, “मोदी टफ नेगोशिएटर हैं। वे डील करने में मुझसे बेहतर हैं।”
ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान मोदी को अच्छी तरह परखा है और इसी कारण उन्होंने फरवरी-2025 में अहमदाबाद में ‘नमस्ते ट्रंप’ कार्यक्रम के लिए भारत यात्रा के दौरान कहा था कि मोदी टफ नेगोशिएटर हैं। अब ठीक पाँच साल बाद जब ट्रंप सत्ता में वापस लौटे हैं और उनका सामना उसी मोदी से हो रहा है, तो स्वाभाविक है कि ट्रंप जानते हैं कि मोदी के साथ डील करना टेढ़ी खीर है। यही कारण है कि ट्रंप को फिर एक बार मोदी को टफ नेगोशिएटर कहना पड़ा।
हकीकत में दूसरी बार सत्ता संभालने के बाद ट्रंप टैरिफ के मुद्दे पर लगातार कड़े तेवर अपनाए हुए हैं, लेकिन यह मोदी की धमक ही है कि ट्रंप ने मोदी के साथ बातचीत के बाद टैरिफ के मुद्दे पर भले ही अपनी बात दोहराई हो, परंतु मोदी ने ट्रंप को यह कहने पर फिर एक बार विवश करने में सफलता पाई, “मोदी टफ नेगोशिएटर हैं।” यदि द्विपक्षीय बातचीत के बाद ट्रंप मोदी को टफ नेगोशिएटर कहने पर विवश हुए हैं, तो यह मोदी की नेशन फर्स्ट के प्रति कटिबद्धता और सफल कूटनीति का ही परिणाम है।
मोदी ने ट्रंप के साथ बातचीत में अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों को शामिल कर टैरिफ के मुद्दे को हल्का करने का सफल प्रयास किया और यही कारण है कि दोनों नेताओं की संयुक्त प्रेस वार्ता में भारत-अमेरिका संबंधों को दुगुनी गति से आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। मोदी की कूटनीति के चलते ही भारत-अमेरिका संबंधों पर ट्रेड वॉर हावी नहीं हुई।
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