Saturday, July 4, 2026
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गुजरात में लगभग 1.24 लाख करोड़ रुपए के निवेश वाले 6 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स के माध्यम से अनुमानित 50,000 से अधिक प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रोजगार का सृजन होगा

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सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए व्यापक राज्य सहायता प्रदान करने वाली समर्पित सेमीकंडक्टर पॉलिसी शुरू करने वाला गुजरात देश का प्रथम राज्य
गुजरात में विभिन्न सहायक तथा आधारभूत उद्योगों की स्थापना द्वारा व्यापक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का हो रहा है तेज विकास

गांधीनगर, 04 जुलाई : स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों तथा डिफेंस संबंधी उपकरणों के लिए सेमीकंडक्टर चिप्स बहुत ही आवश्यक हैं। वैश्विक टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सेमीकंडक्टर क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने हमेशा ‘मेक इन इंडिया’ के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण पर बल दिया है। सेमीकंडक्टर्स के रणनीतिक महत्व को समझते हुए इस क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में भारत में ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम)’ की शुरुआत की गई थी। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन (चिप उत्पादन) एवं डिसप्ले उत्पादन क्षमता को सुदृढ़ बनाना तथा आयात पर निर्भरता कम करना है।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री के विजन को ध्यान में रखते हुए आज गुजरात भारत का अग्रणी सेमीकंडक्टर हब बना है। मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात में इस क्षेत्र के लिए समर्पित सेमीकंडक्टर पॉलिसी लॉन्च की गई है और ऐसी पॉलिसी शुरू करने वाला गुजरात देश का प्रथम राज्य है। गुजरात में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन यानी आईएसएम अंतर्गत छह बड़े सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। इन सभी छह प्रोजेक्ट्स में कुल मिलाकर लगभग 1.24 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया गया है और उनके माध्यम से गुजरात में लगभग 50,000 से अधिक प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की अपेक्षा है। इससे भारत की सेमीकंडक्टर उत्पादन क्षमता और अधिक मजबूत होगी।

गुजरात में माइक्रोन टेक्नोलॉजी तथा केन्स सेमीकॉन के सेमीकंडक्टर प्लांट कार्यरत, शेष शीघ्र होंगे शुरू

गुजरात में मंजूर हुए छह सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, माइक्रोन टेक्नोलॉजी, सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशन्स, केन्स सेमीकॉन, सुची सेमीकॉन और क्रिस्टल मैट्रिक्स शामिल हैं। इनमें से कुछ प्रोजेक्ट्स कार्यरत हो चुके हैं। माइक्रोन टेक्नोलॉजी तथा केन्स सेमीकॉन ने साणंद जीआईडीसी में अपनी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (ओएसएटी) सुविधाएँ स्थापित की हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इस वर्ष फरवरी व मार्च महीने में क्रमशः माइक्रोन टेक्नोलॉजी तथा केन्स सेमीकॉन के प्लांट का उद्घाटन किया गया था और दोनों प्लांट हाल में कार्यरत हैं।

उल्लेखनीय है कि सीजी सेमी शनिवार अर्थात 4 जुलाई से अपनी ओएसएटी फैसिलिटी में कॉमर्शियल प्रोडक्शन शुरू करने जा रही है, जो गुजरात की सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की यात्रा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

सुची सेमीकॉन का ओएसएटी पायलट प्लांट सूरत में पहले से ही कार्यरत है, जो भारत की सेमीकंडक्टर पैकेजिंग एवं टेस्टिंग क्षमता के विकास में योगदान दे रहा है। सुची सेमीकॉन की ओएसएटी फैसिलिटी को हाल ही में आईएसएम द्वारा मंजूरी दी गई है।

धोलेरा में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन (फैब) सुविधा का निर्माण अपने एडवांस स्टेज में है और यह सुविधा भारत की प्रथम व्यावसायिक सेमीकंडक्टर फाउंड्री बनेगी। इसके अतिरिक्त; इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन अंतर्गत क्रिस्टल मैट्रिक्स को भी मंजूरी दी गई है, जो भारत की प्रथम व्यावसायिक मिनी एवं माइक्रो-एलईडी डिसप्ले फैब तथा पैकेजिंग इकाई स्थापित करेगी। इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य शीघ्र ही धोलेरा एसआईआर में शुरू होने की अपेक्षा है।

ये सभी प्रोजेक्ट्स मिलकर फैब्रिकेशन, असेंबली, पैकेजिंग, टेस्टिंग तथा उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को समाहित कर लेने वाली लचीली और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन का निर्माण करने के भारत के प्रयासों में गुजरात को अग्रणी बनाते हैं।

गुजरात में सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए इकोसिस्टम का विकास

स्वीकृत हुए सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स के अतिरिक्त; गुजरात में विभिन्न सहायक एवं आधारभूत उद्योगों की स्थापना द्वारा व्यापक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का तेज विकास हो रहा है। उल्लेखनीय है कि कई वैश्विक और स्थानीय कंपनियाँ राज्य में कार्यरत हो चुकी हैं या फिर राज्य में स्थापित होने की घोषणा कर चुकी हैं; जिनमें लिंडे, ताईवान की टीएसएमटी, जापान की टीएनएसआई व फुजीफिल्म और निप्पॉन एक्सप्रेस, जर्मनी की इन्फिनियॉन टेक्नोलॉजिस, मलेशिया की होतायी तथा अन्य कई कंपनियाँ शामिल हैं। गुजरात में ऐसे भागीदारों की उपस्थिति एक एकीकृत सेमीकंडक्टर क्लस्टर बना रही है, जो बड़े पैमाने पर फैब्रिकेशन तथा पैकेजिंग कार्य को समर्थन दे सकता है।

इसके अतिरिक्त; गुजरात इलेक्ट्रॉनिक्स पॉलिसी, जो भारत सरकार की स्कीम फॉर प्रमोशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स एंड सेमीकंडक्टर्स (एसपीईसीएस) योजना के अनुरूप है, सेमीकंडक्टर तथा इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन गतिविधियों के समग्र क्षेत्र को समर्थन देती है। इसमें कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और टेस्टिंग सुविधाएँ, मटेरियल सप्लायर्स, इक्विपमेंट प्रोवाइडर्स, अल्ट्रा-हाई प्योरिटी गैस के उत्पादक तथा सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए विशेष केमिकल्स शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने हाल ही में आईएसएम 2.0 के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपए के खर्च को मंजूरी दी है, जिसे शीघ्र ही अंतिम मंजूरी के लिए केन्द्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जो भारत की सेमीकंडक्टर क्षमता को और अधिक गहरी बनाएगा।

वित्तीय प्रोत्साहनों, इन्फ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पहलों, इकोसिस्टम को प्रोत्साहन देने वाली पहलों तथा पारदर्शी शासन द्वारा गुजरात का उद्देश्य स्वयं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक सेमीकंडक्टर हब बनाना है, जो राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर मिशन के उद्देश्यों को पूरा करने में सहायक हो।

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