प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन ‘विकास भी, विरासत भी’ को साकार करेगा नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स
फेज 1-ए के तहत 14 में से 6 म्यूजियम गैलरियां 2025 के अंत तक पूर्णतः संचालित होने की संभावना
लगभग 4500 करोड़ रुपए की लागत से तैयार होगा नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स
गांधीनगर, 04 अप्रैल : लोथल में दुनिया की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक सिंधु घाटी की सभ्यता के पुरातात्विक अवशेष मौजूद हैं, जो भारतीय सभ्यता और संस्कृति का गौरव हैं। सिंधु घाटी सभ्यता की भव्य विरासत को प्रदर्शित करने वाला लोथल गुजरात के अहमदाबाद जिले के धोळका में स्थित है। लोथल न केवल सिंधु घाटी की सभ्यता का एक मुख्य व्यापारिक केंद्र था, बल्कि यह भारत की समुद्री शक्ति और समृद्धि का प्रतीक भी था। इस ऐतिहासिक सिंधु घाटी सभ्यता के इतिहास के साक्षी लोथल में भारत की गौरवशाली सभ्यता और विरासत को प्रदर्शित करने वाला ‘नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स’ (राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर-एनएमएचसी) आकार ले रहा है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘पंच प्रण’ के संकल्पों में से एक संकल्प प्राचीन विरासतों पर गर्व और उनका संरक्षण करना है, जो नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के निर्माण के जरिए साकार होने जा रहा है। इस हेरिटेज कॉम्प्लेक्स में इस बात का जीवंत प्रदर्शन किया जाएगा कि पांच हजार वर्ष पहले भारत कैसी सभ्यता वाला राष्ट्र था और किस तरह से यहां वैश्विक व्यापार का संचालन होता था।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से लोथल में दुनिया का सबसे बड़ा मैरीटाइम म्यूजियम तैयार हो रहा है। इस म्यूजियम में भारत की भव्य समुद्री विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स (एनएमएचसी) में इतिहास, शिक्षा, अनुसंधान और मनोरंजन का सुंदर समन्वय होगा। करीब पांच हजार वर्ष पहले लोथल में केवल एक बंदरगाह ही नहीं था, बल्कि यहां समुद्री जहाजों का निर्माण भी होता था, यहां वह गौरवशाली इतिहास भी फिर से जीवंत होगा।
यहां आधुनिक टेक्नोलॉजी के माध्यम से शानदार प्राचीन समुद्री विरासत का अनुभव कराया जाएगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता के कारण इस अति प्रचीन स्थल का पुनःविकास संभव हुआ है। इतना ही नहीं, लगभग पांच हजार वर्ष पुरानी इस सभ्यता को पुनर्जीवित करने का अवसर भी मिला है। साथ ही, गुजरात की प्राचीन विरासत का एक महत्वपूर्ण स्थल, लोथल एक बड़े परिवर्तन का साक्षी बनने जा रहा है। इस प्रकार, गुजरात की समृद्ध प्राचीन समुद्री विरासत को आधुनिक युग के आयामों के साथ जोड़कर बनाया जा रहा यह म्यूजियम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ के विजन को साकार करेगा।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय गुजरात के लोथल में ‘नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स’ का निर्माण कर रहा है। भारत के मैरीटाइम यानी समुद्री इतिहास और टेक्नोक्राफ्ट के मिश्रण के साथ तैयार होने वाला यह हेरिटेज कॉम्प्लेक्स लोगों के लिए एक पर्यटन स्थल के अलावा अध्ययन का एक केंद्र भी बनेगा। नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स को एक नए अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा और इसे दुनिया के अन्य अंतरराष्ट्रीय म्यूजियमों के समकक्ष बनाकर इसके अनुरक्षण पर ध्यान दिया जाएगा।
यह प्रोजेक्ट पूरे भाल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के विकास में भी सहायक सिद्ध होगा। इसके परिणामस्वरूप, यहां हजारों लोगों के लिए रोजगार के अनेक अवसर पैदा होंगे तथा बड़ी संख्या में कुटीर उद्योगों के विकास की भी एक नई राह खुलेगी।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने राष्ट्रीय समुद्री दिवस के अवसर पर कहा “भारत का समुद्री इतिहास हमारे देश के लचीलेपन, नवाचार और दुनिया के साथ संपर्क की विरासत है। नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स केवल हमारी समुद्री विरासत को ही सम्मानित नहीं करता, बल्कि यह एक ऐसे प्रकाश स्तंभ के समान है, जो ज्ञान, नवाचार और राष्ट्रीय गौरव के साथ-साथ भविष्य की पीढ़ियों का मार्गदर्शन करेगा। इस परिसर के माध्यम से हम अपनी समृद्ध परंपराओं को संरक्षित करते हुए देश को एक उज्ज्वल एवं प्रगतिशील समुद्री भविष्य की ओर ले जा रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि, हम राष्ट्रीय समुद्री दिवस 2025 का जश्न मनाने जा रहे हैं, तब पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय भारत की समुद्री अवसंरचना को मजबूत बनाने, स्थिरता को बढ़ावा देने और वैश्विक भागीदारी को बढ़ाने के लिए समर्पित है। नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स (एनएमएचसी) विरासत और प्रगति, दोनों के प्रति भारत के अटूट समर्पण का प्रतीक है, जो भारत के मजबूत समुद्री भविष्य को आकार देकर ‘विकास भी, विरासत भी’ के विजन को साकार करता है। एनएमएचसी दुनिया भर के विद्वानों, इतिहासकारों और आगंतुकों के लिए एक ऐसे केंद्र के रूप में सेवा देगा, जो उन्हें भारत की समृद्ध समुद्री परंपराओं और प्रगति की एक अनोखी झलक प्रदान करेगा। इसमें अत्याधुनिक संग्रहालयों, विरासत संरक्षण की पहलों, इंटरेक्टिव डिजिटल डिस्प्ले और समुद्री अनुसंधान एवं नवाचार के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्लेटफॉर्म का समावेश होगा।
केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा “भारत की समुद्री विरासत अपार गौरव और प्रेरणा का स्रोत है। नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के माध्यम से हम न केवल अपनी भव्य विरासत का संरक्षण कर रहे हैं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए ज्ञान और प्रेरणा प्राप्त करने का एक जरिया भी बना रहे हैं। यह प्रोजेक्ट प्रगतिशील समुद्री भविष्य की ओर आगे बढ़ रहे भारत की अपनी सांस्कृतिक जड़ों को संरक्षित करने की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण बनेगा।”
उल्लेखनीय है कि लोथल में हेरिटेज म्यूजियम को इस तरह से तैयार किया जा रहा है कि भारत का आम व्यक्ति उसके इतिहास को आसानी से समझ सके। म्यूजियम में अत्यंत आधुनिक टेक्नोलॉजी का उपयोग कर सिंधु घाटी सभ्यता के उस प्राचीन युग को फिर से जीवंत करने का प्रयास किया जा रहा है। लोथल, हड़प्पा सभ्यता के सबसे प्रमुख शहरों में से एक था और यह सबसे पुराने मानव निर्मित डॉकयार्ड (गोदी-जहाजों के निर्माण, मरम्मत और आपूर्ति भंडारण का स्थान) की खोज के लिए जाना जाता है। लोथल में नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज म्यूजियम का निर्माण शहर की ऐतिहासिक विरासत की स्मृति को संरक्षित करने के लिए सर्वथा उपयुक्त है। इसके साथ ही, यह पहल मैरीटाइम हेरिटेज म्यूजियम, अनुसंधान और नीतिगत विकास में भारत को एक वैश्विक केंद्र बनाकर प्रधानमंत्री के विजन ‘आत्मनिर्भर भारत’ को साकार करती है।
फेज 1-ए के हिस्से के रूप में 6 म्यूजियम गैलरियों के 2025 के अंत तक पूर्णतः संचालित होने की संभावना है, जबकि फेज 1-बी के अंतर्गत अतिरिक्त 8 गैलरियां आगे के चरणों में पूरी होने की उम्मीद है।

दुनिया का सबसे ऊंचा लाइट हाउस म्यूजियम बनेगा
नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स में दुनिया का सबसे ऊंचा लाइट हाउस म्यूजियम भी तैयार होगा। यह एक आईकॉनिक लाइट हाउस म्यूजियम होगा। यह म्यूजियम 77 मीटर ऊंचा होगा, जिसमें 65 मीटर की ऊंचाई पर एक ओपन गैलरी होगी, जहां से आगंतुक ओपन एयर व्यूइंग गैलरी के माध्यम से आसपास के सुंदर नजारे देख पाएंगे। इतना ही नहीं, यहां रात के समय लाइटिंग शो भी होगा। नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स म्यूजियम में फ्लोटिंग रेस्टोरेन्ट की सुविधा भी विकसित की जाएगी, साथ ही 100 कमरों वाली एक टेंट सिटी भी तैयार की जाएगी। इस म्यूजियम में घूमने के लिए ई-कार की व्यवस्था की जाएगी। यहां 500 इलेक्ट्रिक कारों की पार्किंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा, यहां 66 केवी का सब स्टेशन भी कार्यरत हो चुका है।
समुद्री विरासत पर प्रकाश डालने वाली 14 गैलरियां होंगी
नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स 400 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहा है। राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 375 एकड़ भूमि आवंटित की है। इस म्यूजियम में हड़प्पाकालीन वास्तुकला और जीवन शैली को फिर से उजागर करने के लिए लोथल मिनी रिक्रिएशन के अलावा ‘मेमोरियल थीम पार्क’, ‘मैरीटाइम और नेवी थीम पार्क’, ‘क्लाइमेट थीम पार्क’ और ‘एडवेंचर एंड एम्यूजमेंट थीम पार्क’ सहित कुल चार थीम पार्क के निर्माण से बहुत सारी नवोन्मेषी और विशिष्ट सुविधाएं विकसित की जाएंगी। हड़प्पाकाल से लेकर अब तक की भारत की समुद्री विरासत पर प्रकाश डालने वाली 14 गैलरियों के अलावा यहां अन्य राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की विभिन्न समुद्र विरासत को प्रदर्शित करने वाला ‘कोस्टल स्टेट्स पवेलियन’ भी स्थापित किया जाएगा।
नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स में बनेगी मैरीटाइम यूनिवर्सिटी
इस प्रोजेक्ट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स में मैरीटाइम यूनिवर्सिटी भी बनाई जाएगी। इस प्रकार, मैरीटाइम की डिग्री एक ही स्थान से प्राप्त होगी और छात्र आदान-प्रदान कार्यक्रम को गति मिलेगी। नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स में मैरीटाइम कॉम्प्लेक्स के साथ-साथ अध्ययन के लिए इंस्टीट्यूट भी बनाया जाएगा। इसके साथ ही, दुनिया की सबसे बड़ी अंडर वाटर थीमिंग ओपन गैलरी भी इसी कॉम्प्लेक्स में बनाई जाएगी। यहां आगंतुकों को एक विश्व स्तरीय म्यूजियम का अनुभव मिलेगा। यह नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स आगंतुकों को एक भव्य और गौरवशाली समुद्री इतिहास से परिचित कराएगा, जिसमें शिक्षा, मनोरंजन और आरामदायक समय का अनुभूति होगी।