Sunday, April 6, 2025
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दिल्ली एग्जिट पोल : हरियाणा जैसा धोखा या महाराष्ट्र जैसा धाकड़ ? लेकिन इतिहास कहता है ‘एग्जिट यानी एग्जैक्ट’

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इस बार भी सटीक रहे एग्जिट पोल, तो फट जाएगा केजरीवाल का ‘ढोल’

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 6 फरवरी : दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए 5 फरवरी को मतदान सम्पन्न होने के बाद देर शाम अनेक सर्वेक्षण एजेंसियों द्वारा एग्जिट पोल के अनुमानों की घोषणा कर दी गई और 90 प्रतिशत एग्जिट पोल ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी के 12 वर्षीय  शासन के पतन और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी-भाजपा) की 27 वर्षों के बाद सत्ता में वापसी का अनुमान व्यक्त किया है।

हालाँकि गत वर्ष यानी 5 अक्टूबर, 2024 को चार राज्यों के एग्जिट पोल के आँकड़ों ने जो गड़बड़ियाँ कीं, उसके बाद राजनीतिक दलों तथा जनता के मन में एग्जिट पोल को लेकर संशय पैदा हो गया है। ऐसे में सबके मन में प्रश्न यही उठ रहा है कि दिल्ली का एग्जिट पोल हरियाणा की तरह धोखाधड़ी करेगा या महाराष्ट्र की तरह धाकड़ सिद्ध होगा ?

उल्लेखनीय है कि उन एग्जिट पोल में हरियाणा में सत्ता परिवर्तन की भविष्यवाणी करते हुए सत्तारूढ़ भाजपा को बड़ी पराजय और विपक्ष कांग्रेस को भारी जीत का अनुमान व्यक्त किया गया था, तो दूसरी तरफ महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ भाजपा महायुति की वापसी एवं विपक्ष महाविकास अघाड़ी की हार का अनुमान व्यक्त किया गया था। लेकिन परिणाम बिलकुल एग्जिट पोल के विपरीत आए।

ऐसे में दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए बुधवार को मतदान संपन्न होने के बाद लगभग 11 एजेंसियों के एग्जिट पोल जारी हुए, जिनमें से 9 एग्जिट पोल दिल्ली में 1993 के बाद सत्ता में वापसी की भविष्यवाणी कर रहे हैं, जबकि केवल 2 एग्जिट पोल सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की सरकार के पुनः आरूढ़ होने का दावा कर रहे हैं।

एग्जिट पोल में नुकसान का सामना करने वाला दल हमेशा उन आँकड़ों को गलत बताता है और यही काम आम आदमी पार्टी ने भी किया। पार्टी के कई नेताओं ने तो यहाँ तक दावा किया कि एग्जिट पोल हमेशा आम आदमी पार्टी को कम करके आँकते हैं, लेकिन वास्तविकता यह नहीं है। एग्जिट पोल ने 2013, 2015 और 2020 में जो अनुमान व्यक्त किए थे, परिणाम उन अनुमानों के आसपास ही रहे थे। इतना ही नहीं; दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए 1998 से लेकर 2020 तक छह चुनावों के लिए हुए एग्जिट पोल ने लगभग सटीक अनुमान व्यक्त किए थे।

इस प्रकार इतिहास तो यही कहता है कि इस बार भी दिल्ली का एग्जिट पोल परिणामों के करीब रहेगा और यदि इतिहास का पुनरावर्तन हुआ, तो भाजपा का परचम लहराना और आम आदमी पार्टी तथा अरविंद केजरीवाल का राजनीतिक पतन होना तय है। अब तक के इतिहास के अनुसार एग्जिट पोल यानी एग्जैक्ट पोल ही होता है। इसलिए अगर बुधवार को 11 में से 9 एग्जिट पोल ने आम आदमी पार्टी की हार की भविष्य वाणी की है, तो यह 8 फरवरी शनिवार को दिल्ली चुनाव परिणामों में केजरीवाल की एग्जिट तय है। यद्यपि एग्जिट पोल ने इतिहास नहीं दोहराया, तो जरूर कोई चमत्कार हो सकता है।

दिल्ली में संदेह की गुंजाइश कम

हालाँकि दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर बुधवार को जारी एग्जिट पोल पर संदेह की गुंजाइश कम है, क्योंकि इससे पहले के छह चुनावों में एग्जिट पोल हमेशा परिणामों के निकट रहे हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए पहली बार एग्जिट पोल 1998 में किया गया। तब से लेकर 2020 तक 6 एग्जिट पोल हो चुके हैं और हर एग्जिट पोल चुनाव परिणामों के निकट रहा है। इतना ही नहीं; इन 6 एग्जिट पोल में जिस पार्टी ने बाजी मारी, परिणामों में उसे या तो एग्जिट पोल के आसपास सीटें मिलीं या फिर उससे अधिक। ऐसे में पुराने आँकड़ों को आधार बनाया जाए, तो दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए बुधवार को हुए एग्जिट पोल का रुझान जिस पार्टी की ओर रहा, 8 फरवरी को उसी की जीत की संभावना प्रबल है।

भाजपा का उदय, आम आदमी पार्टी का पतन ?

दिल्ली विधानसभा चुनाव 1998 से 2020 तक के आँकड़ों पर गौर करें, तो स्पष्ट पता चलता है कि जो पार्टी एग्जिट पोल में पिछड़ती है, उसका सत्ता में आना मुश्किल हो जाता है। इसीलिए अब जबकि 2025 के चुनाव में बुधवार को आए एग्जिट पोल में आआपा को पिछड़ी है, तो निश्चित है कि आम आदमी पार्टी का पतन होने जा रहा है और भाजपा का पुनरोदय, क्योंकि दिल्ली के इससे पहले 6 एग्जिट पोल यही कहानी कहते हैं।

इतिहास दोहराएगा अपने आपको ?

1998 – सबसे पहले देखते हैं 1998 में हुए पहले एग्जिट पोल और वास्तविक परिणामों के आँकड़े। दिल्ली विधानसभा चुनाव 1998 में सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला था। चुनाव में प्याज की महंगाई का मुद्दा छाया हुआ था और इसका असर मतदान व एग्जिट पोल में दिखाई दिया। यही कारण है कि 1998 में हुए 3 एग्जिट पोल में विपक्ष कांग्रेस को 49 से 53 सीटें मिलती दिखाई गईं, वहीं सत्तारूढ़ भाजपा को 14 से 17 सीटें व अन्य को 3 से 5 सीटें मिलने का अनुमान व्यक्त किया गया। परिणाम भी इसी के अनुरूप रहे। कांग्रेस 52 सीटों के साथ सत्ता में आई, जबकि 15 सीटें पाकर भाजपा सत्ता से बाहर हो गई।

2003 – इस चुनाव के लिए घोषित हुए एग्जिट पोल के अनुमान कांग्रेस के पक्ष में थे और परिणाम भी वही रहे। एग्जिट पोल में कांग्रेस के 38 से 47 सीटों के साथ सत्ता में लौटने की भविष्यवाणी की गई, जबकि भाजपा की सीटें 20 से 28 बताई गईं। परिणाम एग्जिट पोल के आँकड़ों से मेल खाते दिखे, क्योंकि कांग्रेस 47 सीटों के साथ सत्ता में वापसी करने में सफल रही, जबकि भाजपा 20 सीटों पर सिमट गई।

2008 – इस चुनाव में भी एग्जिट और एग्जैक्ट पोल में ज्यादा अंतर नहीं रहा। एग्जिट पोल में जहाँ कांग्रेस को 39 से 43 सीटों के साथ सत्ता में वापसी का संकेत दिया गया, वहीं भाजपा के फिर एक बार 25 से 33 सीटों पर रहने का अनुमान व्यक्त किया गया। परिणामों पर नजर डालें, तो कांग्रेस ने 43 सीटों के साथ एग्जिट पोल के अनुमान के अनुसार सत्ता में वापसी की, जबकि भाजपा को 23 सीटें ही मिलीं।

2013 – दिल्ली की राजनीति में यह चुनाव पहली बार द्वदलीय चुनावी व्यवस्था से परे था, क्योंकि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी का उदय हो चुका था। पहली बार चुनाव लड़ रही आआपा पर राजनीतिक गलियारों में इतनी चर्चा नहीं थी, लेकिन एग्जिट पोल ने जनता का मन पढ़ लिया था। इस चुनाव में केजरीवाल के उतरने से त्रिकोणीय मुकाबला हुआ। 2013 के एग्जिट पोल ने फिर एक सही आकलन करते हुए लगभग त्रिशंकु विधानसभा का संकेत दिया। एग्जिट पोल में सत्तारूढ़ कांग्रेस को केवल 9 से 17 सीटें मिलने का अनुमान व्यक्त किया गया, जबकि भाजपा को 29-42 और नई आआपा को पहले ही चुनाव में 19 से 31 सीटें मिलने का अनुमान व्यक्त किया गया। परिणाम बिलकुल एग्जिट पोल के साथ गए और सत्तारूढ़ कांग्रेस 8 सीटों पर सिमट गई, जबकि भाजपा 31 सीटें जीत कर सबसे बड़ी पार्टी बनी, वहीं नई आम आदमी पार्टी ने पहले ही चुनाव में 28 सीटें हासिल की।

2015 – दो वर्ष में ही दिल्ली में मध्यावधि चुनाव हुए। पंद्रह साल तक शासन करने वाली कांग्रेस अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही थी, तो आम आदमी पार्टी और केजरीवाल का दबदबा काफी हद तक बढ़ चुका था और भाजपा के समक्ष लोकसभा चुनाव 2014 की भारी जीत को दोहराने के साथ ही अब चुनौती के रूप में कांग्रेस नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी थी। इस चुनाव के लिए हुए सभी एग्जिट पोल ने सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी को बहुमत दिया। एग्जिट पोल के अनुसार आम आदमी पार्टी को 35 से 46 सीटें मिलती बताई गईं, जबकि भाजपा को 19 से 33 एवं कांग्रेस को 0 से 5 सीटें मिलने का अनुमान व्यक्त किया गया। परिणाम एग्जिट पोल की सीमा को पार कर गए और आम आदमी पार्टी ने 67 सीटों की ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जबकि भाजपा 3 सीटों पर सिमट गई और कांग्रेस लुप्त हो गई।

2020 – इस चुनाव में भी एग्जिट पोल की धारा फिर एक बार सही दिशा में बही। भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2019 की जीत को बनाए रखने की भरसक कोशिश की, लेकिन एग्जिट पोल ने घोषणा कर दी कि अरविंद केजरीवाल तथा आम आदमी पार्टी 44 से 68 सीटों के साथ सत्ता में वापसी करने जा रहे हैं। एग्जिट पोल में भाजपा को 2 से 26 सीटें और कांग्रेस को 0 से 4 सीटें मिलने का अनुमान व्यक्त किया गया। परिणाम एग्जिट पोल की धारा के साथ सटीक बैठे और आम आदमी पार्टी 62 सीटों के साथ दूसरी ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए सत्ता में लौटी, जबकि भाजपा को 8 सीटें मिलीं। कांग्रेस फिर लुप्त ही रही।

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