Sunday, August 31, 2025
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संजय दत्त जन्मदिन विशेष: 66 की उम्र में भी ‘बाबा’ का जलवा बरकरार

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29 जुलाई 1959 को जन्मे संजय दत्त बॉलीवुड के उन सितारों में से हैं, जिनका जीवन किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं रहा। कभी सुपरस्टार, कभी विवादों में घिरे, तो कभी जेल की सलाखों के पीछे—लेकिन हर बार एक नई शुरुआत के साथ वापसी की।

करियर की शुरुआत: एक स्टार किड से सुपरस्टार बनने तक

संजय दत्त ने बतौर बाल कलाकार अपने पिता सुनील दत्त और मां नरगिस की फिल्म ‘रेशमा और शेरा’ (1971) से शुरुआत की थी। 1981 में फिल्म ‘रॉकी’ से उन्होंने बतौर लीड एक्टर बॉलीवुड में कदम रखा।

खास बात:

उनकी मां नरगिस उनकी डेब्यू फिल्म के कुछ दिन पहले ही गुजर गईं, जिससे संजय भावनात्मक रूप से टूट गए, लेकिन उन्होंने फिर भी अपनी पहली फिल्म पूरी की।

गोल्डन हिट्स और किरदार जो अमर हो गए

  • ‘नाम’ में एक मजबूर युवक
  • ‘खलनायक’ में ग्रे शेड्स वाला बॉलर रोल
  • ‘वास्तव’ में एक आम आदमी से गैंगस्टर बनने की कहानी
  • ‘मुन्नाभाई’ में कॉमेडी, इमोशन और मेसेज का परफेक्ट मिश्रण

विवादों और अंधेरे दौर की कहानी

रॉकी की सफलता के बाद संजय को शोहरत मिली, लेकिन साथ में मिली ड्रग्स की लत। उन्होंने खुद बताया कि एक दौर ऐसा था जब वो सुबह उठने से पहले ही नशे में होते थे। अमेरिका में रिहैब जाना पड़ा।

वो दौर ऐसा था जहां हर कोई कहता था — “इस लड़के से कुछ नहीं होगा।”
लेकिन संजय ने अपनी सबसे बड़ी लड़ाई खुद से लड़ी — और जीत हासिल की।

मोहब्बतें, अफेयर और टूटा दिल

संजय का दिल बड़ा था, और प्यार में भी काफ़ी खोया।
टीना मुनीम, फिर माधुरी दीक्षित, और फिर अफवाहें कि उन्होंने रेखा से गुपचुप शादी की।

लेकिन सच तो ये था कि संजय को हमेशा एक ऐसा रिश्ता चाहिए था जिसमें उन्हें मां जैसा अपनापन मिले। उन्हें प्यार मिला, लेकिन पूरी उम्र उनका दिल अक्सर खाली ही रहा।

जब दुनिया ‘खलनायक’ कहने लगी

1993 में मुंबई में हुए सीरियल बम ब्लास्ट ने देश को हिला कर रख दिया। और जब जांच एजेंसियों ने संजय दत्त का नाम लिया, तो मानो हर कोई चौंक गया।

संजू बाबा भी?

अवैध हथियार रखने के आरोप में उन्हें जेल जाना पड़ा। बॉलीवुड का चमकता सितारा, अचानक मुजरिम नंबर 117 बन गया। जेल की सलाखों के पीछे उनकी आंखें हर रात एक ही सवाल पूछतीं—”क्या मैं वाकई इतना बुरा हूं?”

जेल से वापसी और फिर से सुपरस्टार

5 साल की सजा काटने के बाद जब संजय जेल से बाहर आए, तो लोग भूल चुके थे। लेकिन उन्होंने नहीं भूला — अपनी मां की कही बात: “तू लड़ेगा बेटा, और जीतेगा।
और संजय ने वापसी की।

फिल्में जो साबित करती हैं — “बाबा अभी बाकी हैं

  • मुन्नाभाई MBBS: जहां एक गैंगस्टर ने लोगों को इंसानियत सिखाई
  • लगे रहो मुन्नाभाई: जहां गांधीगिरी एक ट्रेंड बन गई
  • KGF 2: 60 की उम्र में भी संजय ने विलेन बनकर स्क्रीन लूटी

कैंसर, परिवार और आज का संजय

2020 में संजय को लंग कैंसर डिटेक्ट हुआ। लोग फिर डर गए — “अबकी बार शायद…”
लेकिन नहीं। बाबा ने फिर जंग जीती।

आज वो मान्यता दत्त के साथ एक स्थिर और शांत जीवन जी रहे हैं। उनके जुड़वां बच्चे — इकरा और शहरान, उनकी दुनिया हैं।
वो फिटनेस करते हैं, ध्यान करते हैं, और लोगों को सिखाते हैं कि ज़िंदगी एक मौका नहीं, कई मौके देती है — अगर आप हार मानना छोड़ दें।

निष्कर्ष: जो गिरा, फिर उठा — वही असली हीरो

संजय दत्त की कहानी किसी स्क्रिप्ट से बेहतर है —
जहां हीरो असल में रोता है, हारता है, गलतियां करता है — लेकिन फिर उनसे सीखता है।

आज उनके जन्मदिन पर हम सिर्फ एक एक्टर को नहीं,
एक इंसान को सलाम करते हैं, जिसने ज़िंदगी को पूरी ईमानदारी से जिया।

जन्मदिन मुबारक हो संजय दत्त!

आपने सिर्फ एक्टिंग नहीं की, ज़िंदगी को जिया — और हमें जीना सिखाया।

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